संकटमे ‘सावनके डोला’

rana tharu

लखन चौधरी/कैलाली।
पश्चिम तराईके रानाथारू समुदायके साँस्कृतिक ओ धार्मिक महत्वके सावनके डोला दिनप्रति दिन संकटमे परटी गैल बा। कौनो बेला एकदमे प्रचलित संस्कारके रुपमे रहल सावनके डोला अर्थात हिरोल्ना झुल्न प्रथाके संरक्षणमे कमी ओ आधुनिकताके क्रमसंगे संकटग्रस्त अवस्थामे पुगल हो।
प्रायः खेतीपातीके काम सेकलपाछे फुर्सदके समयहे सदुपयोग कर्ना तथा राहरंगी कर्ना प्रमुख माध्यमके रुपमे सावनके डोलाके प्रयोग करजाइठ। मने समयके क्रमानुसार लौव पुस्तामे हस्तान्तरण हुई नैसेक्ना, समुदायभित्तर आयआर्जनके लाग औरे काममे बह्रल व्यस्तता तथा आधुनिक मनोरञ्जनके साधनके विकास संगे उ संस्कृतिके अस्तित्व संकटमे रहल रानाथारू अगुवाहुकनके कहाई बा।

रानाथारू बुद्धिजीवी तथा पूर्व सभासद मालामति रानाके अनुसार सावनके डोला रानाथारू समुदायके प्रमुख संस्कारके रुपमे रहल बा। मने समयके क्रमसंगे लोप हुइलमे भर उहाँ चिन्ता व्यक्र कर्ली।
ऐतिहासिक पक्षके बारेमे उल्लेख जानकारी देटी उहाँ सावन महिनाके अँधरियासे लेके ओजरियाके तेसर दिनसम सक्कुजहनके पायक पर्ना ठाउँमे बनाइल सावनके डोलाके माध्यमसे मनोरञ्जन लेना प्रचलन रहल बटैली। जौन बेलामे दुर–दुर रहल चेलीबेटी, सँघरियनसे भेटघाट हुइना माध्यम फेन बन्टी आइल बुद्धिजीबी रानाके कहाई बा।

सावन महिना लागलपाछे आपन चेलीबेटीहुकनहे पहुनी खवाइक लाग अनिवार्य लेहेजाइक पर्ना फेन उ समुदायके प्रचलन हो। जौन कारण सावनके डोला ओ सावन महिनाहे रानाथारू समुदायमे सम्बन्ध सुधारक महिनाके रुपमे लेजिना बटैठी धनपा–८ धनगढी गाउँके स्थानीय लालमति राना। उहाँ रातके समयमे थारू–जन्नी आपसमे सामूहिक रुपमे गीत गैना ओ सावनके डोला झुल्न चलन रहल जानकारी देली। उहाँ फेन दिनप्रति दिन रानाथारू समुदायके प्रचलनसे सावनके डोला हेरैटी गैलमे दुःख व्यक्त कर्ली।

उ समुदायमे सावनके डोलाके धार्मिक महत्व धिउर रहल बा। अँधरिया ओराइलपाछे सुरु हुइना ओजरियाके तेसर दिन अर्थात सावनके डोलाके अन्तिम दिन हो। जौन दिन उ समुदायमे तीजके ब्रत बैठ्ना फेन प्रचलन बा। मने यी ब्रत आपन थारूवाहुकनके लाग नाई बैठके आपन दादा, भैया, भतिजुवाहुकनके सु–स्वास्थ्य तथा दिर्घायूके कामनाके लाग बैठना चलन कायमे रहल जनागिल बा।

पूर्व सभासद मालामति रानाके अनुसार उ अन्तिम दिन अर्थात तीजके दिन सावनके डोलामे रहल लसरी (पगहा)के मुख्य गाँठ (मुरिया) के पुजा कर्ना प्रचलन बा। ओहे दिन लग्गेक लदिया, डुन्द्रामे जाके विबाहित जन्नी मनै सात ओ अविबाहित जन्नी मनै पाँचठो कुशक गाँठमे पूजा करठै। ओकरपाछे उ कुशके जुट्का (झुरकी) लदियामे पुहैना ओ भैया, भतिजुवनके सु–स्वास्थ्य तथा दिर्घायूके कामना करजाइठ। जेहिसे सक्कु सोचल काम पुरा हुइना जनविश्वास रहल बा।

सावनके डोला रानाथारू समुदायके ऐतिहासिक पहिचान ओ आस्थासे जोरल सस्कारके रुपमे रहल बा। जेकर संरक्षण ओ सम्वर्द्धनमे मुर्त रुप लेहे नैसेक्लेसे फेन अइना दिनमे संरक्षण ओ सम्वर्द्धनमे ध्यान देहक पर्ना आवश्यकता रहल रानाथारू बुद्धिजीवीहुक्रे महसुस करटी रहल बाटै।

सभासद प्यारेलाल राना सावनके डोला मनैना तौरतरिका लौव पुस्तामे हस्तान्तरण नैहुइना, समुदायभित्तर मनैना समयमे एक रुपता नैहुइनाके कारण संकटमे परल औल्याइलै। उहाँ संस्कृति संरक्षणके लाग लौव पुस्ता जागरुक हुइक पर्ना जरुरी रहल बटैटी समुदायके चाडपर्व, टरटिहुवारलगायत संस्कारमे एक रुपता नानेक लाग क्यालेण्डर हुइक पर्ना जरुरी रहल महसुस कर्लै। अइना दिनमे नियमित क्यालेण्डर फेन प्रकाशनमे नन्ना जनैटी उहाँ तमान वर्ग समुदायके चालचलन राज्यके सम्पति रहलओरसे संरक्षणमे राज्यके लगानी हुइक पर्ना फेन विचार व्यक्त कर्लै।

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