सिकलसेल प्रकोपके कारण, आदिबासी थारुन्मे त्रास

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लक्की चौधरी, धनगढी- थारु बहुल क्षेत्रमे हालसम थारुनमेकिल देखापरल सिकलसेल एनिमियाके प्रकोपसे थारु समुदाय त्रासमे रहल थारु अगुवाहुक्रे बतैले बातैं । थारु कल्याणकारिणीसभा ओ थारु नागरिक समाजके संयुक्त अगुवाईमे मंगरके यहाँ आयोजित छलफल कार्यक्रममे उहाँहुक्रे त्रासके चिन्ता व्यक्त करल रहैं । नेपाल पत्रकार महासंघके केन्द्रीय सदस्य तथा पत्रकार लक्की चौधरी ओ थारु अगुवा बुन्दीलाल चौधरीके विशेष पहलमे आयोजना हुइल छलफल कार्यक्रममे उपस्थित थारु अगुवाहुक्रे सिकलसेल महामारीके रुपमे देखा पर्लक् ओरसे केन्द्र सरकारहे सुनैना विशेष पहल कैदेना आग्रह कर्लेरहैं ।
चिकित्सक हुक्रनके कहाईअनुसार आदिबासी थारुहुक्रे मलेरिया जैसिन महामारी रोगसे तबदिनमे लर्लक्कारण ऊ बेलासे ओइने सिकलसेल जैसिन रोगके शिकार हुइती आइल बातैं । मने, रोग प्रमाणित हुइना अत्रा धेरदिन लग्लकओरसे आजआके सिकलसेल एनिमिया रहल पुष्टि हुइल बा । रोग परीक्षणके पर्याप्त सुविधाके अभावमे रोग पुष्ट्याइँ हुइनामे समय लागल चिकित्सकलोगनके कहाइ बा । यी रोग थारुनमे किल नै थारुनसे औरे समुदायके मनै भोज कर्लसे क्रमशः संक्रमित जिन सरेसेक्ना चिकित्सक हुक्रनके दावी बातिन् ।
थारु कल्याणकारिणीसभा कैलालीके अध्यक्ष प्रभात चौधरीकेअनुसार सिकलसेल एनिमिया रोग वंशानुगत तरिकासे सरथ् । दाई ओ बाबामे रहल ऊ रोगके संक्रमण बालबच्चनमे स्वतः सरेसेक्ना चिकित्सक लोगनके कहाईहे उहाँ उदृत कर्लैं । रक्तअल्पता, निमोनिया, हाडजोर्नी बठैना जैसिन लक्षण देखापर्ना यी रोगके परीक्षण करकलाग स्थानीयस्तरमे मेशिनके अभाव हुइलक् कारणफे रोगके निदान असम्भव बन्तीगैल चिकित्सक हुक्रनके कहाईहे उहाँ प्रष्ट्यैलैं । aiklesss-2
आदिबासी थारुलोगनहे किल लग्ना यी रोगके बारेमे सरकार समयमे गम्भीर हुईपना ओ निशुल्क उपचारके व्यवस्था करेपर्ना अध्यक्ष चौधरी माग कर्लैं । थारु पहिचान ओ वंश जोगाइपर्ना चुनौति देखापरल चिन्ता दर्शैती चौधरी कहलैं “सरकार हालीसेहाली यी रोगके बारेमे आधिकारीकरुपसे सर्वेक्षण करके प्रतिवेदन प्रस्तुत करेपरल ओ विमारीन्के उपचारफे निःशुल्करुपसे व्यवस्था हुई परल ।” थारु बुहल जिल्लामे रोग परीक्षणकेलाग मेशिनके व्यवस्था ओ विशेषज्ञ डाक्टरके व्यवस्था कर्नाफे उहाँ सरकारसे माग कर्लै ।
थारु नागरिक समाजके संयोजक दिलबहादुर चौधरी रोग पुष्टि हुइलपाछे थारु समुदायमे त्रास पैदा हुइल बतैलैं । “रोगके बारेमे जानकारी नैहुइतसम किहुहे डरत्रास नैरहे मने जब डाक्टरलोग रोग थारुनमे किल लग्ना पुष्टि कर्लै तवसे थारुनमे एक किसिमके त्रास पैदा हुइल बा”, कहती चौधरी आघे थप्लैं “रोगके बारेमे आभिन सरकारसे आधिकारीकरुपमे पुष्टि नै हुइल हो, यकर छानविन हालीसे हाली करके रोग उपचारके व्यवस्था सरकारसे हुई परल ।”
कानूनव्यवसायी तथा थारु अगुवा नाथुराम महतो सिकलसेल रोगके कारण सैयौं थारुहुक्रे ज्यान गुमा सेक्लक्ओरसे सरकारहे गम्भीर हुईना आग्रह कर्लै । रोगके बारेम् एकाएक समाचार प्रकाशन पाछे अधिकांश थारुहुक्रनमे डर पैदा हुइलसेफे अत्याजिना अवस्था नैरहल चिकित्सकलोग बताइल उहाँ जानकारी करैलैं । सिकलसेल रोगके बारेमे आभिन मनैनमे जागरण लन्ना बाँकी रलक्ओरसे पत्रकार लोगनहे कलम चलादेना उहाँ आग्रह कर्लैं ।
अधिकारकर्मी टीका चौधरी आपनमेफे रगतके कमजोरी हुइलक् ओरसे सिकलसेल रहल बा कि कना मनमे त्रास पैदा हुइल बतैली । अन्तरजातीय भोज करल चौधरी आपन परिवारके सदस्यनसे रकत परीक्षणके दवाव आइल बतैली । अन्तरजातीय भोज करल मनैनमे प्राय सिकलसेल नैरहना चिकित्सकलोग पुष्टि करलपाछे मनमे राहत मिल्लसेफे हालीसेहाली रकत परीक्षण कर्ना तयारीमे रहल ऊ सुनैली ।
पत्रकार दिपक उपाध्याय रोगके बारेमे चिकित्सकलोग पुष्टि करसेक्लक्कारण आभिनसम थारुनमेकिल यी रोग देखापरल बतैलैं । नवलपरासीसे कञ्चनपुर क्षेत्रसमके थारुनमे यी रोगके पहिचान हुइल बात चिकित्सकलोग बताइल जानकारी देती पत्रकार उपाध्याय कहलैं कि “सरकारके ध्यानाकर्षण कराके यी रोगके निदानके बारेमे सक्कुजे आपन ठाउँसे पहल कर्ना जरुरी बा ।”

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थारु अगुवा कुन्नुराम चौधरी सिकलसेलकेकारण सैयौं थारुलोगनके ज्यान गैलसेफे रोगके पहिचान हुइ नैसेक्लककारण एकिन तथ्याङ्क हुइ नैसेकल बतैलैं । हरेक दिनजैसिन सिकलसेलके रोगी अस्पतालमे उपचारमे अइना मने, अन्य रोगकेकारण ज्यान गैल बतैलककारण सिकलसेलके विरामीन्के संख्यामे एकिन नैआइल उहाँक् कहाई बा ।
सेती अञ्चल अस्पतालमे सिकलसेल एनिमिया विमारीनहे हेर्ती आइल फिजिसियन डा. शुभेषराज कायस्थ हाडजोर्नी दुख्ना, निमोनिया हुइना, जन्डिस हुइना, पेट बठैना लक्षण यी रोगमे देखापरल बतैलैं । अस्पतालमे अइना हालसमके विरामीमध्ये थारुनमेकिल यी रोगके लक्षण देखापर्लक् कारण पुस्तौनी रोग रहल उहाँके दावी बा । वंशानुगतरुपसे सर्ना यी रोगसे अधिकांश थारुलोगनके ज्यान जासेकल हुइलसेफे प्रमाणित हुइना ढिलाइ हुइनामे संख्यामे कमी आइल उहाँ बतैलैं ।
दैनिक दुईसे चार विरामी अस्पतालमे यिहे रोगके कारण अइना दावी कर्ती डा. कायस्थ कहलैं, “रोगके शुरुमे उपचार कर्लसे मनैनके आयु बढाईसेक्ना बा मने यकर निदान कर्ना असम्भव बा ।” थारु समुदायसे अन्य समुदायके मनै भोज विहा कर्लसेफे रोगके संक्रमित जिन अन्य समुदायमेफे सरेसेक्ना सम्भावना उहाँ बतैलैं । आज थारुनमे रहल यी रोग विस्तारे अन्य समुदायमेफे सरेसेक्ना सम्भावना उहाँ देखैलैं ।
स्रोत साधन ओ परीक्षणकेलाग मेशिनके उपलब्धता नैरलक कारणसेफे रोग प्रमाणित कर्ना धिउर समस्या लागल बतैती कायस्थ कहलैं कि सरकार यी रोगके निदानमे गम्भीर बन्ना जरुरी बा । रोग प्रमाणिक करकलाग काठमाडौं या भारतके अस्पतालमे रगत परीक्षणकेलाग पठाइर्ना बाध्यता रहल बतैती डा. कायस्थ कहथैं, “रोग गम्भीर बा, मने पुष्टि हुइना समय लग्लक्कारण बहुत विमारीनके उपचारके क्रममे ज्यान गैलिन् ।” सेती अञ्चल अस्पतालमे आइतघरिम ४४ जनहनके उपचार करल बतैती डा. कायस्थ कहथैं “उपचार करे नै अइना थारुनके संख्या अधिक रलक्ओरसे धिउर थारुलोग यी रोगसे प्रभावित रहल उहाँक् कहाई बा ।
सेती अञ्चल अस्पताल नर्सिङ वार्डकी संयोजक यशोदा ढकालके अनुसार आजसम ४४ जाने उपचारकरके घर घुमल बातैं । मने कैयौ जनहनके मृत्यु हुइल बा । संक्रमित विमारी नियमित औषधि उपचारकेलाग अस्पताल पुग्तीरहल उहाँ बतैली । रगतके मात्रा एकदम कम हुइना प्रमुख समस्या रहल सिकलसेलके विरामीनहे रगत चढाइतसम कुछ राहत हुइना मने महिना दिनमे पुनः सक्कु चढाइल रगत सोंखजिना समस्या बा । सामान्य पारिवारिक अवस्था रहल मनैनहे नियमित उपचार कर्ना समस्या पर्ना हुइलक कारण अधिकांशके ज्यान गैल उहाँ बतैली ।
ढकालके देहल जानकारीअनुसार हालसम अजय चौधरी (१६), विना चौधरी (२२), निरज कठरिया  (१९), विमला चौधरी (११), हिमा चौधरी (१३), सन्तोष चौधरी (१२), प्रदेशु चौधरी (२२), विपिन चौधरी (९), बुधनी चौधरी (३०), गीतादेवी चौधरी (२२), आदेश चौधरी (२०), वविता चौधरी (१४), हरिकिशन चौधरी (१५), भोजोरी रानाथारु (२३), सीता चौधरी (२६), सरिता चौधरी (२०), हरिप्रसाद चौधरी (२२), सुनिता चौधरी (१७), रेखा कठिरिया (१६), प्रविन चौधरी (१५), हरिराम चौधरी (१६), इमरती राना (१४) लगायतके बातैं ।

– सिकलसेल एनिमिया आदिबासीनमे लग्ना बंशानुगत रोग
– रोग लागल दिनसे विरामीके आयु धिउरमे ५० वरष ।
– थारु समुदायके सदस्यसे भोज करल अन्य समुदायमेफे रोग सर्ना सम्भावना ।
– हालसम पश्चिम तराईके करिब तीनसय धिउर जनहनके ज्यान गैल दावी ।
– ९० प्रतिशत डंगौरा थारु, ५ प्रतिशत रानाथारु ओ ५ प्रतिशत कठरियनमे सिकलसेल ।

One thought on “सिकलसेल प्रकोपके कारण, आदिबासी थारुन्मे त्रास

  1. Dear Sir,

    Thanks for your bold article about Disease of sickle animiya.Its also acknowledgement to me about sickle cell.

    Just watching your article there are lots of people lost their life due to the sickle disease according to the medical treatment.
    Here is my concern how can we trust that those people lost their life due to the sickle cell disease. nowadays there are not available any instruments to check that disease in our hospital & clinics though how can the physician proved death of peasant is sickle cell. In the foreign country there are several research, broad practices & organized high level seminar in participation of scholars to get feedback & justify Sickle cell disease (SCD). they also designed various tools & technique to treat.

    I accepted that it is genetic & inherent disease. If we disseminate it without justify it will divided in two parts & also create discrimination in society

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