गाउँ बिगरगैल…!

Lakhan Chaudhary, Asso Editor of Pahura daily of tharu languge paper from dhangadhiकोई कुलुवक इपार, कोई उपार
गाला मराटै, माखुर मेठाटै
कोड्रक किट छुट्ले नार्ई हो
कुल्हारा केवल बेगारी चुकाइटै
डारल लाठी जसके टस
गरढुरिया बुडु बेचयनीसे भुन्भुनाइटै
केकर आँखी लागगैल यी गाउँमे
भैयौं सारा गाउँ बिगरगैल कहिके।
खबर आइल एकफाले
गाटेरुवन पच्छिउक लिपु जोटे लग्नै
ओ चारु मोहरा गेसे लग्नै,
चार भैयान्के चार पाँजर मुह
उ ओकर आँसमे, उ दोसरके
बुडीबुडुनके कर्रा, जोटकारल जोगैना
ओ कहलै भैयौं गाउँ टे बिगरगैल।।
दिदीबाबु चिल्ला उठ्लै
हम्रे लुटगिली, हम्रे लुछगिली
बर्बाद होगिली, सिकार बनगिली,
चारु भैया अप्ने सुरमे
कोई सुनल, कोई सुनके फेन नैसुनल
कोई हेरल, कोई तमासा मानके हेरल
मने, सबके ध्यान डरुवा ओ करछुलमे
मरटे दम बाबु कहली, डाडु का होगैल
फुरेसे, हमार गाउँ बिगरगैल का?
सुस्करटी बुडी कहली
कुजात जन्मैनु काहुन
सारा गाउँ बिगरगैल।।

लखन चौधरी
पहुरा थारू दैनिक धनगढी, कैलाली

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