थारु भाषा गजल

निशा चौधरी-
मोकमसे तिक्खर नजर मारल यी जोन्ह्या
आपन मैगर मैयाके घेरम पारल यी जोन्ह्या
पैल्ह मिठ मिठ बात करक मैया जालम फँसाक
आज आक बिच डगरीम बात घुमाईल यी जोन्ह्या
सड्ड सड्ड चहाजब्ब पकरक हाँठ सँग सँग
कत्रा बन्वा कत्रा खोल्वा कटाइल यी जोन्ह्या
देखाउ टुँ सपना रमाउँ मै अत्रा
बात बात म बद्रीक तोरैया झ्वारल यी जोन्ह्या
अन्ढरीया रात हुइल यी जिन्दगी मजबुरी कहुकी अपन भाग्य
ओजरिया हँ अन्त बसाई सारल यी जोन्ह्या
बाचा करो तुँ जनम जनम के लाग
कसमम बचनम भरोसाम हारल यी जोन्ह्या
मोकमसे तिक्खर नजर मारल यी जोन्ह्या
आपन मैगर मैया के घेरम पारल यी जोन्ह्या
नयाँगाउँ–४, बर्गदही, बर्दिया
हालः कीर्तिपुर, काठमाडौं

4 thoughts on “थारु भाषा गजल

  1. Babu Gajal te likhli lakin abhin dher mehnat kaina jaruri ba. Gajal ke muri Kafiyame Ekrupta nai ho. aksharme fen nai ho. tabbo paryas maja ba kahe sekjai.

  2. मोर रचना

    पुर्खान से चल्टि आइल हम्र रित बचाइ प्रथा ।
    संस्कृति के धनी थारू हुईट चिनाइ प्रथा ॥

    थरीक थरीक भेष भुषा व फरक हमार भाषा ।
    हम्र थारू एक हुईटी संसारन हम्र चिनाइ प्रथा ॥

    बनाखन सुघर नेपाल मिल्ला खन हम्र संस्कृति ।
    सम्मरीदके सुघर हमार नेपाल चिनाइ हम्र प्रथा ॥

    काट मार छोर्खन भईया भईया मिलाखन झग्रा ।
    हम्र संविधानम थारू के अधिकार लिखाई प्रथा ॥

    राम पछलदङग्याँ अनुरागि
    दाग्ङ / हेकुलि ८ हेकुलि
    :-):-):-):-):-(:-(:-(:-(
    हाल / बिछोडको बस्ती

  3. थारु सायरी
    आसुक किमत उ जनत
    जे कहुक याद करात
    दिल के गम उ जनत
    जे कहुक प्यार करात
    सघरियक दर्द उ सम्झात
    जे सघरियक दिल से मनत
    मे . सरु चौधरी

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