कवितामे छाईलः थरुहटके मुद्दा

KRISHNA SARBAHARI PHOTO.docकृष्णराज सर्वहारी- थारू कौनो फेन हालतमे मधेशी नै हुइट। ओहेसे थारून् मधेशीक् सूचीकरणसे हटाइ परल कना माग कर्टी थरुहट संयुक्त संघर्ष समिति बैशाख १२ गते प्रधानमंत्री सुशील कोइरालाहे ज्ञापनपत्र बुझाइल। समितिमे आवद्ध २० ठो संस्थाके प्रतिनिधिलोग प्रधानमंत्री निवास बालुवाटार पुगके ज्ञापनपत्र बुझैलाँ। थारु कल्याणकारिणीसभाके केन्द्रिय अध्यक्ष चन्द्रकुमार चौधरी ज्ञापनपत्र पह्रके सुनैलाँ।
ओहेरोज संविधानसभाके अध्यक्ष सुवास नेम्वाङ ओ एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनालहे फेन टोली ज्ञापनपत्र बुझाइल। समिति खासकैके ६ ठो माग आगे सर्ले बा। जेकर मुख्य मागमे संविधानसभा सदस्य विधेयक २०७० ओ नेपाल स्वास्थ्य सेवा ऐन २०५३ हे संशोधन कैजैना बनल विधेयक २०७० मे तराईके थारूलगायत आदिवासी जनजातिन्, मुस्लिम आदिहे मधेशी समुदायमे सूचीकरण कैगैल गलत निर्णयहे सच्याइ कैहगैल बा। अध्यक्ष नेम्वाङ थारून् मधेशीमे सूचीकरण कैगैलमे सरकारके ध्यानाकर्षण करैना जनैलाँ।
एकओर राजधानीसे ज्ञापनपत्र बुझैना, सुनुवाइ नैहुइलेसे आन्दोलन कर्ना ठेक्ठी खिटकोर जैटी बा कलेसे इहे क्रममे डोसरओर सामाजिक सञ्जाल फेसबुकमे थारू कौनो फेन हालतमे मधेशी नै हुइट कना अभियान जोर पकर सेक्ले बा। सानोश्री, बर्दियाके सुरज बर्दियाली हाल साउदी अरबमे रहठाँ। उहाँ आपन मनके अभिब्यक्ति असिक लिख्ठाँ–
हमार आपन पहिचान बा, मधेशी निहुइटी
थारू हमार छुट्ट निशान बा, मधेशी निहुइटी
तराईबासी पर्ली हम्र, भूमिपुत्र कैक जन्ना
बर्षौ साल पुरान प्रमाण बा, मधेशी निहुइटी
जागी युवा, घन्काइ नारा, जय थारूवान कैख
साथ हमार भगवान बा, हम्र मधेशी निहुइटी
सुरज बर्दियाली एक टे युवालोगन जागे कहठाँ। उपरसे हमार संगे भगवान बा कना दुवा मंग्ठा। उहाँ डोसर रचनामे लिख्ठाँ–
भूमिपुत्र हुइटि कैख डेखाइ पर्ना बा
सरकारह फे ठिउन्ही टेकाइ पर्ना बा
थारून्हक पहिचानम गरल गिद्दे नजर
जरसे उक्ठाख यहाँसे मेटाइ पर्ना बा
चामचिचम रबि ट मिल्जाइ मधेसम एकदिन्,
विरोध कैख थारूवान छेकाइ पर्ना बा

इहे क्रममे धनगढीके सत्यनारायण दहित मुक्तकमार्फत् असिक आपन पहिचानके लग ज्यान न्यौछावर कर्ना प्रण कर्ठा
थारून्के अलग पहिचान बटिन इतिहास कहटा।
ओइन्के गुरिया गहना चालचलन गीतबाँस कहटा।
यहाँ आदिवासी थारू जाति तराईके भूमिपुत्र हुइट,
ज्यान डैडेब् मधेसी नैबनब थारून्के सास कहटा।…
कवितामे फेन आन्दोलनके शक्ति रहठ। सत्यनारायण दहित मुक्तकमार्फत् जौन हुंकार कर्ले बटाँ, ऊ मुठ्ठी उठाके करल कनौ नेताके भाषणसे कम नैहो।
टुहार जग्गक खुटा गारक, साँढ छाँटट,का ह्यरटो टु?
टुहार छाई बहिन्यनक, नाक काटट का ह्यरटो टु?
टुहार नसम टाटुल खुन बा कि नाई अई थारू?
मधेशी बनाक टुहार पहिचान ख्वासट का ह्यरटो टु?
उप्रक् मुक्तक मार्फत् राजधानीमे बैठ्टी रहल प्रसादु थारू आपन समुदायके युवन् ललकर्टी बटाँ। कि आपन पहिचान मेटजैनामे फेन टु का हेरटो? ओहोर नेपालगञ्जसे कवि सोम डेमनडौरा फेन प्रसादु थारूक् हस रहानमे रहान मिलैटी बटाँ। उहाँक् शव्दा असिक बोल्ठिन्ः
कठ निबोल्ना, निसुन्ना, चाल निकर्ना मुवल हुइट
आंग फुहर औरकम चिल्लर डेखुइया बुहल हुइट
अई थारू टुह्र चाल ट करो, जीयल बाटो कलसे
पहिचान चिन्ह निजन्ना सब सामन्तीक दुहल हुइट

माफ करबी, यी टरक लाइन, मै कौन कविके टुक्का डाउनलोड कर्लु। मने रचनामे आगी डम्कल बा।
बराबर डगरामे जब कोई कोरी खटहा, तो हमरे पुरके छोरब
थारूहे मधेशी बनुइया पागल फटहा, तोर घमण्ड टुरके छोरब
स्वदेशसे फेन विदेशमे रबो टे आपन जलम धर्तीके आउर मैया लागठ। हाल कामके सिलसिलामे साउदी अरबमे रहल चितवनके कुमार चौधरी आपन भावना असिक फेसबुकमे अपडेट कर्ठा–
जाँरक खोर्यम जीन बुरो थारू, आप कुछु कर पर्ठा
आपन हक अधिकारके लग सक्कुज लर पर्ठा
औरज कडेही कैख जीन सोचो, यिहे सोचले पाछ पर्ली
थारून मधेशीम बनाइ नि पैबो कैख आघ बह्र पर्ठा
उहाँ यहाँ जाँरक खोरियम नैहैरैना चेतावनी डेले बटाँ। मुनुवा–४, कैलालीके रामचन्द्र चौधरी कामके साउदी खरबमे कतार बटाँ। मने थारून्के पहिचान हेरैना अवस्थामे पुगलमे उहाँक् फेन छटपटी बटिन्।
हम्रे थारू युवा एक्क बोली बनाके उठी।
गाउँ–घर सब ओर हाली जनाके उठी।।
मधेशी नाई, “भूमि पुत्र हम्रे थारू” हुइटी।
सक्कु ओरसे बल्गर यिहे नारा लगाके उठी।

उहाँ गजलके डोसर रचनामे असिक पन्वा डरठाँ–

थारू, भाषा, संस्कृति बचाई जुटी थारू युवा।
अपन थारू पहिचान बनाई जुटी थारू युवा।।
“हम्रे थारू कौनो हालतमे मधेशी नाई हुई”।
बल्गर नारा मिल्के लगाई जुटी थारू युवा।।
‘अई थारू समाज कानम तेल डारके नाइ हुई’।
अपन राज्य स्थापना कराई जुटी थारू युवा।।
सरकारमे आन्ढर बन्के बैठल हमार नेतनके।
मधेशीम डारल भ्रम हटाई जुटी थारू युवा।।
थारू पहिचान सहितके संविधान जारी कराई।
घर–घरसे खबरदारी जनाई जुटी थारू युवा।।

कीर्तिपुरमे हरेक महिनक् अन्तिम शनिवार कविता शृङ्खला हुइठ। चैत २९ गते कञ्चनपुरके कवियत्री प्रकृति पूजाके सुनाइल कवितामे अपन पहिचानके प्रश्न ओ दम डेखाडेना चेतावनी बा।
का बिगार डेलरही हम्र थारूमसे मधेशीम झारडेलो
अरे कुइ ट कहो, हमार पहिचान के हो छिनटा
थारूनके रिस नैडेखल हो हमन गोरु समझटा
अब ट हुइ हम्र पुरुबसे पच्छिउँ सम
एकचो आउर आब थारून्के डेखा डी दम
ओ अन्तमे, यी पंक्तिके ओरौनीमे गायिका सोमती चौधरीक् गाइल टरक गीत फेन यहाँ खौक्ना प्रासंगिक रही। जौन गीतमे थरुहट राज्य बचाइक लग आह्वान कैगैल बा।

आदिवासी थारू हम्रे,
धर्ती पुत्र तराइके
इहे भूमि हुइटा मधेश,
कसिके बचाई पहिचान?
आब नाही छोरब अधिकार,
अइ हो थारू भाइ
चाहे डेहे परी बलिदान
उठे परल ब्यापारी, विद्यार्थी
थरुहट राज्य बचाइक लग।

ए कवि, उप्रक् श्लोक पह्रके का अपनेक कलम फेन नैहुरचुराइठो? यदि हुरचुराइटा कलेसे उठाइ कलम। मारी शव्दरुपी लब्डा, ओकर कप्पारीम, जे हमार पहिचान छिनटा। विदेशमे पसना चुहैटी रहल डाडु भैयन् टे आपन पहिचानके चिन्ता बटिन कलेसे अपनेन पहिचानबिहीन होके जिना मन्जुर बा?
साभारः २०७१ बैशाख २१

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