संविधान सभाके चुनाव ओ थरुहटके पहिचान (थारु भाषा)

KRISHNA SARBAHARI PHOTO.docकृष्णराज सर्वहारी- 
मुअल थारू हुइटुँ मै
साँस केल चल्ठा
फुर आओ ए छेम्हेन
आ रै चिल्ह्रा
एक झपट मारो
ओ मही लैजाओ
जहाँ थारू जिट्टी बट।
यी कविताके पंक्ति विहान २०७० पत्रिकामे छपल कवि राजकुमार कान्छाके हो। कविताके शब्द केरैना हो कलेसे एकफेरा सब्जे गहिंरके सोंचे पर्ना बा कि मै मुअल थारू हुइटुँ कि जियल?
डश्या लगत्ते देउखर गढवामे थारू कल्याण कारिणी सभा आपन साधारण सभा कर्ले रहे। जेम्ने क्षेत्र नं १ ओ २ के सवहस पार्टीक थारू उम्मेद्वारन आ–आपन विचार कहना मौका डेगैल रहे। मने प्रायः उम्मेद्वार एक डोसरहे आरोप लगैलां। देउखरसे सभासद बनल रुक्मिनी चौधरी का कर्ली? कना प्रश्न फेन उठा गइल। सभासद उम्मेद्वारलोगनके मुखौटा हेरेबेर अपवाद बाहेक वडामे फेन जित्ना कर्रा बटिन कना गनमन सुनगैल। मै कत्रा पानीम बटु पता नै पैना, बुह्रे मुवँटु कैहके अर्सीम पौहे्र खोज्ना उम्मेदवार छिछालेडर बटाँ। आपन परिवारबाहेक केक्रो भोट नै पैना स्थिति रहल मनै फेन उम्मेदवार बनल डेख्के कहुँ नाई लागल चुनाव थारून्मे लाग गैलिन जसिन लागठ।

देउखर गढवाके सभामे बोलेबर माईक नाई मजासे बोलल् कारण एकठो उम्मेदवार कैह बैठल– अईसीन नाई काम लग्ना ठोत्रे माईक ना लन्बी, नै टे मै बगाडेम।’ अईसीक उहाँक उत्तेजित कहाई सुनके गनमन सुनगैल, बिना जितल टे यी मनैया अईसीक करटा, जितके आई टे झन कैसिक करी। पहुरा दैनिकमे कार्तिक ४ गते थारू नेता के कत्रा पानीमे कना मोर लेखके प्रतिक्रियामे एक सभासदके उम्मेद्वार धम्कीक् भाषा डेके खण्डन समेत छापे कहलाँ। राजनीतिमे बडवार धैर्य चाहठ। जौन बहुत कम नेतन् मे बिल्गठ। पहिला बात नेतन्मे आमसभाहे सम्बोधन कैगल जुरुक–जुरुक उठैना शक्ति चाहठ। जिहीसे सम्मोहित होके जनता अपन पक्षमे आईंट। डोसर बात कोठे गफमे सिपार हुई परठ, जिहीसे संगठन बल्गर रहठ। थरुहट आन्दोलनके बड्वार उपलब्धी मध्ये का हो कलेसे यी ढेर युवा नेता जन्माईल। थारू पहिचान नाई छोरना चाही कना आत्मबल जगाईल। भाषण कैना क्षमता बह्राईल। मने संगठनके सवालमे, कोठे गफके सवालमे थारू नेता सिपार हुई नै सेक्लाँ।

थरुहट आन्दोलनमे लक्ष्मण थारूक बाद मिडियामे छाईल कोई नेता रहे टे, उ थारू कल्याणकारिणी सभाके तत्कालीन महामन्त्री राजकुमार लेखी रहे। आज हेरी लेखीक् राजनीतिक संगठनके हाल का बटिन? राष्ट्रिय नागरिक पार्टी गठन करल लेखी सात सदस्यीयसे ढेर कार्य समिति बनाई नै सेक्ठुईट। जिल्ला–जिल्लामे संगठनके टे बाते दुर। विज्ञप्ती निकरती बटाँ की हमार पार्टी चुनाव वहिष्कार भर नै करी, चुनावमे भाग फेन नै ली। लेखी आपन हैसियत बुझ्के चुनावमे लर्ना हिम्मत नै करला। मने हेरी दाङसे लेके पश्छिउ कंचनपुर टक थारू सभासद उम्मेद्ववारन्के टमान ऐसिन अनुहार, बहुट कटकर्री बटाँ। ओसैबी टे कुछ नाई भेटैबी।

डश्यम घरे अईनासे पहिले कीर्तिपुर बैठुईया थारू संघरियन प्रज्ञा भवन कमलादीमे थारू नेतन्के जुटौला करले रही। कि लेउ नेता लोग हमरे डश्या माने जाईटी, थारू समुदायक मनैन् टुहिनके का सन्देश बा? कुछ पहुरा डेउ। कार्यक्रममे लेखी भाषणमे खोख्लाँ कि एमाओवादी, कांग्रेस, एमाले यी ३ दलमे रहल कौनो थारून् भोट ना डेउ यइने थरुहटके पक्षमे नै हुईट। मधेशी दल भित्तर रहल थारू नकली थारू हुईट, यइन फेन भोट ना डेउ। लेखीक् कहलक मतलबसे अक्केठो भोट डेहे लाईक पार्टी, रैहगैल भानुराम थारू, गोपाल दहितके सँवारल थरुहट तराई पार्टी नेपाल। कत्रा सुन्दर रहट यदि लेखी उ पार्टीम छिरके पुरुवओर संगठन विस्तार करडेटाँ। थरुहट आन्दोलनके राजनीतिक पिल्लर लेखी ढलके निश्चय फेन पुरुव थरुहटके संगठन कमजोर बा।

काठमाण्डौं डश्या मिलनके कार्यक्रममे रुक्मिणी चौधरी हुईट या गोपाल दहित। असली नकली थारून्के बात उठैलाँ। मधेसी पार्टीमे छिरल नकली थारून्से सावधान हुई कहलाँ। रुक्मिणी चौधरी जे गैल संविधानमे थरुहटके पक्षमे शानदार वकालत करली, ओकर लाग जत्रा प्रशंसा करलेसे कम नै हुई। मने अब्बे आईबेर हुकार दल संघीय लोकतान्त्रिक राष्ट्रिय मञ्च (थरुहट) के संगठन शुन्य बा। हुँकार गग्री भरना मुश्किल बटिन्। यहाँ सम कि देउखर क्षेत्र नम्बर २, जहाँसे ऊ पहिले समानुपातिक सभासद चुनगैल रही, उहाँसे हुँकार दलके अब्बे प्रत्यक्ष उम्मेद्वार फेन नैहो। कत्रा सुन्दर रहट, यदि उ थरुहट तराई पार्टीमे अब्बे रटी।

कार्तिकके पैल्हा अठ्वार मै कैलाली धनगढीमे रहुँ। उहाँ से ६ नम्बर क्षेत्रमे प्रत्यक्ष उठल फोरम लोकतान्त्रिकके लक्ष्मण थारूक् बारेम चोक–चोकमे प्रतिक्रिया सुनगैल। यदि उ थरुहट तराई पार्टीमे रटाँ कलेसे जित सेवर रहिन्। दल बदलक् कारण मुश्किल बाटिन्, फिर भि थारू उ उम्मेदवारमे सबसे बलगर उहे हुईट।
लक्ष्मण थारू माओवादी, थरुहट तराई पार्टी या फोरम लोकतान्त्रिक जौन पार्टीमे पैंठके जै दिन राजनीति करलाँ, संगठनहे बल्गर बनैलाँ। अचानक थरुहट तराई पार्टी नेपाल छोरके गच्छदारके पल्ला पकरके थरुहटके पक्षमे रहल जनता अवश्य दुखी बटाँ। मने लक्ष्मण थारू या योगेन्द्र चौधरी किहु गर्याके आप कोई फाईदा नै हो। लक्ष्मण थारूहे बेन टे थरुहट तराई पार्टीके संघरियन धन्यवाद डेना चाही। जेकर बलले उ पार्टीक पिलर गाडे सेक्गैल।

आब छट पिटैना की छप्रा छवईना काम पार्टीम लागल संघरियन्के हो। उ फोरम लोकतान्त्रिकमे छिरके दाङसे पश्छिउके राजनीति किल नाही, पहाडमे फेन पार्टीहे उच्वाडेले बटा। लक्ष्मण जौन संगठनमे लागठ उही बल्गर कराईठ कना यी एकठो प्रमाण हो। फोरम अत्रे किल नाही, लोकतान्त्रिकके घोषणा पत्रमे चितवनसे पश्छिउ थरुहट प्रदेशके लाग लिखा सेकल। ओहेसे अब्बे के असली के नकली थारू कैहके एक डोसरके गुलछर्रा उरैनासे फेन गहिरके सोचे पर्ना बा। यहाँ कैलाली ५ ओ ६ से ६ के उम्मेदवार लेखराज भट्ट ओ शेर बहादुर देउवा पार्टीहे गोली मारके एक डोसरहे साथ डेना ओ जैसिक फेन जितके जैना गोचाली मिला सेक्लाँ। मने हमरे एक आपसमे टै गडहा, मै गडहामे लागल बटी।

चुनावके रेल छुट सेकल, सबजाने आपन–आपन डिब्बामे बैठ सेक्लाँ। जे जौन डब्बामे बैठ्लेसे फेन थरुहट एक्सप्रेसके यात्रा टब पुरा हुई, जब हमरे मिलके जित्ना साझा उम्मेदवार तोक्के जाबी। कत्रा सुन्दर हुईट यदि साझा उम्मेदवार बनाके कैलाली ३ से फोरम लोकतान्त्रिकके रामजनम चौधरी, ४ से संघीय समाजवादीके होरी लाल चौधरी, ५ से थरुहट तराई पार्टी नेपालके माधव चौधरी, ६ से लक्ष्मण थारू जितके जैटाँ। ओ हमरे कैलाली कञ्चनपुरहे कौनो हालतमे अखण्ड सुदूरपश्छिउमे गाभे नाई डेब कना मजा सन्देश डेटाँ। यदि अईसीन तालमेल कैके मजा सन्देश नाई डेहे सेकब कलेसे हमरे मुअल थारूनके राजनीति करटी रहब। संसदमे नाही, खाली सडकमे किल जय थरुहटके नारा लगैटी रहब। हिन्दीमे एकठो कहावत बा– हमे तो अपनो ने लुटा, गैरोमे कहाँ दम था। मेरी किस्ती भि दुबी वहाँ, जहाँ पानी कम था।
साभारः १ मंसिर, गोरखापत्र

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